बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 1)

By | March 31, 2016

मनुवाद आश्चर्यजनक रूप से आज भी चर्चा में है। बाबा साहब अम्बेडकर के हाथ से लिखी एक पांडुलिपि में मनु के अछूत विरोधी सिद्धान्तों का विस्तार से उल्लेख है। बाबा साहब के अनुसार हिन्दू सामजिक व्यवस्था वर्णों और व्यक्तियों के बीच की असमानता पर आधारित है। बाबा साहब अपने काल तक मनु के सिद्धांतो को जीवित देखते।

Untouchables of Malabar. बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद, shridev sharma

उनके अनुसार पेशवा राज में अछूतों को पूना में शाम के तीन बजे से सवेरे नौ बजे तक घुसने की इजाजत नहीं थी। तब शरीर की छाया लंबी होती है। यदि ये छाया किसी ब्राम्हण पर पड़ जाती तो वह अपवित्र हो उठता – इससे बचने के लिये अछूतों पर रोक लगा दी गयी। जानवर या कुत्ते नगर में आराम से घूमते पर अछूत समाज नहीं।
अछूत जमीन पर थूक नहीं सकते थे। उन्हें थूकने के लिये गले में मिट्टी का बर्तन टांग कर चलना पड़ता। यदि उनके थूक पर किसी हिन्दु का पैर पड़ जाता तो वह अपवित्र हो उठता न, इसीलिये। उसे एक काँटेदार झाड़ी से जमीन को साफ़ करते हुए चलना पड़ता। ताकि उसके पैरों के निशान साफ़ हो जाएँ। यदि कोई ब्राम्हण सामने से आ जाता तो अछूत धरती पर मुँह रख कर लेट जाता ताकि उसके शरीर की छाया ब्राम्हण को छूकर अपवित्र न कर दे।
महाराष्ट्र में शूद्र को गले में या कमर में काल धागा पहनना पड़ता ताकि उसको पहचाना जा सके। गुजरात में पहचाना जा सकने के लिये गले में सींग लटकाना पड़ता।
पंजाब में अछूत को काँख में झाड़ू दबाकर घूमना पड़ता।
बम्बई के अछूतों को सिर्फ़ फटे पुराने कपडे पहनने की इजाजत थी। यदि उन्हें कपड़ा बेचा जाता तो दुकानदार उसे फाड़ पुरना कर देता।
मालाबार में अछूत एक मंजिला से ऊपर घर नहीं बना सकते थे।न ही वह अपने मुर्दों का दाह संस्कार कर सकते थे। उन्हें छाता लेकर चलना मना था। जूता या सोने के गहने पहनने की इजाजत नहीं थी। वे दूध भी नहीं दुह सकते थे।
दक्षिण भारत के अछूतों को शरीर के कमर के ऊपर के हिस्से में कपड़ा पहनने की मनाही थी।इसी तरह उनकी स्त्रियों को भी कमर के ऊपर का हिस्सा बिना ढके रहना पड़ता।