बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती

By | April 14, 2016

बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती आज है। एक परम्परागत समाज में व्याप्त वर्णव्यस्था में अपमान उन्हें विरासत में मिला था। परंतु उनकी प्रतिभा अध्ययनशीलता, समाजनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति ने भारत के प्राचीन राष्ट्रवाद को, स्वाधीन सार्वभौम लोकतान्त्रिक कालानुसारि राज्यव्यवस्था के रूप मे पुनः प्रतिष्ठापित किया।

Ambedkar 125th Birth Anniversary

 

वे सदा धर्मनिष्ठ रहे। धर्म का उन्होंने गहन अध्ययन किया। ब्राम्हण और श्रमण विचारधारा के मूल सिद्धान्त उन्होंने हृदयंगम कर लिये थे। उनकी लेखनी ने धर्म और व्यवहार की सूक्ष्मता से परख की। उनका काल उनकी प्रतिभा से दिशा प्राप्त कर सका।
ये तय है कि भगवान् भारतवासियों के मध्य किसी न किसी दिव्य आत्मा को भेजते हैं , जो झकझोर कर भारतीय चेतना को जागृत रखती है। डा.अम्बेडकर का जन्म ऐसे ही काल में हुआ।

भारत महाभारत की सीमाओं को खो रहा था। ‘ईश्वरः सर्वभूतानाम् हृद्देशेर्जुन तिष्ठति’ का ये गीता का उदघोष जो हमें हर अस्तित्ववान् के ह्रदय में बैठे ईश्वर का स्मरण कराता था हम खो चुके थे। हमारी धर्मदृष्टि क्षीण हो चुकी थी। हम टुकड़े टुकड़े जी रहे थे। तब जिन महापुरुषों ने भारत को जगाया और और गौरवमय राष्ट्रचेतना के सनातन ध्वज को भारत माता के हाथ में पुनर्स्थापित किया, उसमें वो अग्रगण्य ही रहेंगे।

वे धार्मिक थे, जीवनभर राष्ट्रधर्म का निर्वाह किया। छुआछूत भारतमाता के ह्रदय को शोकाकुल करता है, ये उन्होंने हर हिन्दू को याद दिलाया।महापरिनिर्वाण से पूर्व बुद्ध के सनातन धर्म के संघ की चेतना की दीक्षा प्राप्त की।


ऐसे महापुरुष को उनके जीवन की सपाद शताब्दी पर शतशत नमन।