Category Archives: JNU Debate

क्या अम्बेडकर मनुवादी थे ?

इंडियन एक्सप्रेस में प्रो. शमसुल इस्लाम ने 23 अप्रैल को  एक ” नहीं है अम्बेडकर से प्रेम” इस शीर्षक से लेख निकाला। गुरू जी के हिंदु जनों के विराट पुरुषत्व की अवधारणा के आधार पर मनुस्मृति के संवैधानिक सिद्धांतों की अवहेलना संविधान सभा द्वारा किये जाने को याद दिलाया। साथ ही यह भी कह डाला… Read More »

Guha, the RSS and Ambedkar

Ramchandra Guha has reminded the Sangh of past writings of Guruji Golvalkar. Guruji wrote that ‘Maharshi’ Nehru and ‘Rishi’ Ambedkar had dispensed with Sanatan Dharm while framing the Constitution. Therefore it is reflective of an inner conflict within the RSS. The aforesaid comments by Guruji were made when the provisions of divorce were introduced. Sanatan… Read More »

गुहा, संघ और अम्बेडकर

रामचन्द्र गुहा जी ने गुरु जी गोलवलकर के लेख का स्मरण संघ को दिलाया है। गुरु जी ने कहा था कि महर्षि नेहरू और ऋषि अम्बेडकर ने संविधान के नाम पर सनातन धर्म को तिलांजलि दे डाली। ऐसे में आज अम्बेडकर को हिंदु सुधार और एकता का प्रतीक बताना संघ के अन्तर्विभेद का द्योतक है।… Read More »

बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती

बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती आज है। एक परम्परागत समाज में व्याप्त वर्णव्यस्था में अपमान उन्हें विरासत में मिला था। परंतु उनकी प्रतिभा अध्ययनशीलता, समाजनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति ने भारत के प्राचीन राष्ट्रवाद को, स्वाधीन सार्वभौम लोकतान्त्रिक कालानुसारि राज्यव्यवस्था के रूप मे पुनः प्रतिष्ठापित किया।   वे सदा धर्मनिष्ठ रहे। धर्म का उन्होंने गहन अध्ययन… Read More »

राष्ट्रवाद, दलित आदिवासी अधिकार, सोनाखान का संघर्ष और प्रो.आरी सितास का वक्तव्य

आरी सितास ने छात्रों को दिये वक्तव्य में कहा कि सोने की खदानों को हडपने, अफ्रीकी मूल निवासियों को वंचित करने के लिए, अंग्रेजों नें कानून बनाये और शोषण किया। यह वक्तव्य उन्होंने इसलिए दिया ताकि ये प्रमाणित किया जा सके कि, स्वंतत्रता के बाद भी आदिवासियों और दलितों को अपने आप को बचाने के… Read More »

अभिव्यक्ति के अधिकार के अनुचित इस्तेमाल के खतरे एवं समाज में असमानता के निराकरण की लंबी प्रक्रिया

जनेयू का दूसरा टीच इन प्रो. आरी सितास द्वारा हुआ।ये दक्षिण अफ्रीका के हैं और समाज विज्ञान और राजनीति विज्ञानं के विद्वान अध्येता माने जाते हैं। 19 फरवरी के इनके विद्यार्थियों को दिये वक्तव्य का सार संक्षेप इस प्रकार है: इनके अनुसार बर्लिन में बैठकर दक्षिण अफ्रीका को व्यापारिक उद्देश्यों के लिए तोड़ा गया था।उपनिवेशवाद… Read More »

जनेयू में अवतरित हुआ राष्ट्रवाद पर चर्चा का पर्व

गोपाल गुरु ने जनेयू में टीच इन का आरम्भ राष्ट्रवाद से किया । उनके प्रवचन का सार संक्षेप प्रस्तुत है। उनके अनुसार “यदि यथार्थ में देखा जाए तो भारत सामजिक रूप से अम्बेडकर की ‘पुरस्कृत’ और ‘बहिष्कृत’ की परिभाषा के अनुसार आज भी बँटा है। आजादी के 67 वर्ष बाद भी हम इस खाई को नहीं… Read More »

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 5)

“हिन्दु धर्म के दर्शन पर विचार” डा. अम्बेडकर ने हिन्दु धर्म पर सारा विचार वर्ण व्यवस्था को धर्म का केन्द्र बिन्दु मान कर रखा। उनके अनुसार एक हिन्दु दूसरे हिन्दू के साथ कुछ बाँट नहीं सकता । न जीवन काल में, न मृत्यू के बाद । एकता और भाईचारे की भावना से हिन्दु अपरिचित हैं।… Read More »

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 4)

गाँधी और कांग्रेस नहीं देना चाहते अछूतों को राजनैतिक संरक्षण बाबा साहब के अनुसार गाँधी अपनी अछूतों के मसीहां की इमेज को स्वराज के चैम्पियन की छवि से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। राउंड टेबल कांफ्रेंस के दौरान गांधी ने स्वयं को अछूतों का अग्रदूत बता डाला। अपने इस चैम्पियन के रोल को गांधी किसी के साथ… Read More »

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 3)

“…हम हिंदू हैं ,हम हिंदू ही रहेंगे…” जनेयू के विद्यार्थियों ने अनेक तरह के विवादास्पद नारे 9 फरवरी 2016 को एक आतंकवाद और आतंकवादी को महिमामंडित करते हुए लगाए। पर जब उन पर पुलिस की कार्यवाही हुई और पूरे देश में उनकी थू थू हुई तो वे बाबा साहब के उपर्युक्त लेख की शरण में… Read More »

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 2)

बम्बई प्रेसीडेंसी में तो सुनारों की ये हालत थी कि वे चुन्नट लगाकर धोती नहीं पहन सकते। वे एक दूसरे को “नमस्कार” नहीं कह सकते। मराठा शासन में ब्राम्हणों के अतिरिक्त अन्य कोई वेद मन्त्रों का उच्चारण नहीं कर सकता। करता तो उसकी जीभ काट दी जाती। अनेकों सुनारों की जीभ पेशवाओं ने इस कारण… Read More »

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 1)

मनुवाद आश्चर्यजनक रूप से आज भी चर्चा में है। बाबा साहब अम्बेडकर के हाथ से लिखी एक पांडुलिपि में मनु के अछूत विरोधी सिद्धान्तों का विस्तार से उल्लेख है। बाबा साहब के अनुसार हिन्दू सामजिक व्यवस्था वर्णों और व्यक्तियों के बीच की असमानता पर आधारित है। बाबा साहब अपने काल तक मनु के सिद्धांतो को… Read More »

कन्हैय्या बन रहा काला पहाड़

गार्जियन में मार्क टाउनसैण्ड की ब्राइटन से रणभूमि तक : कैसे चार किशोर जिहाद की ओर प्रेरित हुए शीर्षक से प्रकाशित समाचार बेहद भयावह है। यह उन किशोरों के बारे में है जो ब्रिटिश मूल के गैर मुस्लिम थे और जिहाद के प्रचार में डूब कर मुस्लिम बने। आइसिस के जिहाद का हिस्सा बन लड़े… Read More »