Category Archives: Sanatana Dharma and Hinduism

धर्म एवं संविधान

हमारे राष्ट्र भारत ने राजा राम से लेकर वर्तमान संविधान तक की यात्रा तय करी। संस्कृत के आदि कवि वाल्मीकि ने रामायण की रचना करी । कवि का अर्थ संस्कृत में, कविता लिखने वाले तक सीमित नहीं है अपितु कवि तो क्रांतदर्शी है।  क्रांतदर्शी वो है जिसकी दृष्टि को समय अपनी सीमाओं मे न बाँध… Read More »

ऊं

स्वभावतः हम सभी जन्म से ही एक पहचान प्राप्त कर लेते हैं। ये पहचान हमें मैं और मेरा इस तरह की अनेकों सीमाओं में बाँध देती है। इस सीमित स्व से अपने परम विस्तार को ज्ञात करानॆ वाली विद्या ही ब्रम्ह विद्या है। यह विद्या उपनिषद, गीता, ब्रम्हसूत्र इस प्रस्थान त्रयी में उपनिबद्ध है। ये… Read More »