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ऊं

स्वभावतः हम सभी जन्म से ही एक पहचान प्राप्त कर लेते हैं। ये पहचान हमें मैं और मेरा इस तरह की अनेकों सीमाओं में बाँध देती है। इस सीमित स्व से अपने परम विस्तार को ज्ञात करानॆ वाली विद्या ही ब्रम्ह विद्या है। यह विद्या उपनिषद, गीता, ब्रम्हसूत्र इस प्रस्थान त्रयी में उपनिबद्ध है। ये… Read More »